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  • वर्ष 1991 में भारत ने जब अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया, तब भारत और चीन सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लिहाज से लगभग एक ही पायदान पर थे। विशुद्ध रूप से कम-लागत वाले उत्पादन की बदौलत चीन हमें तेजी से पछाड़ते हुए आगे निकल गया, जो अक्सर शोषणवादी श्रम कानूनों की कीमत पर होता है। सस्ते उपभोक्ता सामान के नशे में दुनिया ने चीन के इस आक्रामक विकास मॉडल के खतरों को अनदेखा कर दिया। अब कोविड-19 ने एक सबक सिखाया है कि अनैतिकता और अन्याय से कभी स्थायी विकास संभव नहीं है। इस उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्था को लागत की इस स्पर्धा से आगे जाना होगा। इसे विश्वास और मानवता पर आधारित होना चाहिए। इस नए सूर्योदय में भारत के पास एशिया का पावरहाउस बनने का दमदार अवसर है। कई बातें हैं, जो हमारे पक्ष में हैं। पहली, लोक केंद्रित लोकतंत्र की हमारी शैली और खुली आलोचना पारदर्शिता के सूचक हैं। भारतीय कानून और उनके कार्यान्वयन की समीक्षा कोई भी कर सकता है। हमने जैविक हथियार बनाने के नापाक मंसूबे कभी नहीं पाले। बर्बरता से विपक्ष को कुचलने वाले चीन की एकदलीय व्यवस्था के मुकाबले हमारे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कहीं अधिक विश्वसनीय हैं। दूसरी, हमारे शिक्षित और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवा विश्व की नई अर्थव्यवस्था के निर्माण की रीढ़ हैं। आज जो भी सेक्टर दुनिया में स्वयं को फिर से खड़ा करना चाहता है, वह इसके लिए भारतीय युवाओं की सहायता ले सकता है। तीसरी, उपभोक्ता देश के रूप में भी हम शक्तिशाली हैं। कोई भी बहुराष्ट्रीय कंपनी हमारे बड़े बाजार को हाथ से नहीं जाने दे सकती। हमारे पास अवसर है कि हमारे स्थानीय उद्यम बड़ी वैश्विक कंपनियों से सीखें, साझेदारी करें और आगे एक दशक में और भी बड़े बाजार पर व्यापार करें।
  • चंडीगढ़ में बड़े सेक्स रैकेट का पर्दाफाश, बस

    जेएनएन,चंडीगढ़।चंडीगढ़पुलिसनेरविवारकोशहरमेंएकबड़ेसेक्सरैकेटकाभंडाफोड़कियाहै।पुलिसनेसेक्टर-43स्थितबसस्टैंडसेकुलपांचलोगोंक […]

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  • रांची के इन होटलों में चल रहा था सेक्स रैकेट,

    रांची.रांचीकेचुटियाथानाक्षेत्रमेंचलरहेसेक्सरैकेटकाखुलासाहुआहै.दरअसल पुलिसद्वारारांचीकेस्टेशनरोडस्थितकईहोटलोंमेंसिटीडीएसप […]

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