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  • विशेष संवाददाता, नई दिल्ली राज्यसभा चुनाव के दौरान हरियाणा में हुई वोटिंग में अचानक 14 वोटों का अवैध घोषित हो जाना महज इत्तेफाक है या फिर यह एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा। दरअसल, इतनी तादाद में वोटों के अवैध होने से कांग्रेस और आईएनएलडी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार आर. के. आनंद हार गए, जबकि बीजेपी समर्थित निर्दलीय सुभाष चंद्रा राज्यसभा पहुंचने में कामयाब हो गए। हरियाणा में आनंद की हार महज एक सीट का सवाल नहीं है, बल्कि कांग्रेस के नजरिए से इस हार की गूंज आने वाले दिनों में चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक सुनाई देगी। इतना ही नहीं, इस हार को कहीं न कहीं राज्य नेतृत्व द्वारा हाइकमान के वर्चस्व का चुनौती भी माना जा रहा है। माना जा रहा है कि जिस तरह से कांग्रेस में राज्यसभा चुनाव को लेकर दो मत थे, उसे देखते हुए लग रहा है कि इसमें बाकायदा खेल हुआ है। जहां एक ओर कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व आनंद के पक्ष में था, जबकि हरियाणा के ज्यादातर नेता खासकर विधायक चंद्रा के पक्ष में थे। वहां पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा खुद चंद्रा के पक्ष में थे। चुनाव से महज एक दिन पहले हरियाणा को लेकर दिल्ली में मीटिंग हुई, जिसमें सैद्धांतिक रूप से आनंद के सर्मथन पर सहमति बनी। बताया जाता है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मंजूरी का संकेत मिलने के बाद ही यह समहति बनी थी। इस मीटिंग से निकलने के बाद खुद हुड्डा ने मीडिया से कहा था कि सोनिया हमारी नेता हैं और हमारा रुख वही होगा, जो उनका आदेश होगा। लेकिन जिस तरह से कांग्रेस के वोट अवैध हुए, उससे साफ है कि पार्टी विधायकों ने हाइकमान के आदेश की अनदेखी की है।
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