परस धर्म मरठ महत

  • सात फरवरी के काले दिन ने चिपको आंदोलन की प्रणेता गौरा देवी के गांव रैणी का भूगोल तबाह कर दिया। दो हिस्से में बंटे रैणी के निवासियों के लिए रात की खामोशी खौफ का एहसास कराती है, जबकि दिन चढ़ने के साथ ही वो कुछ बेहतर होने की आस लेकर खुद को दिलासा देने लगते हैं। घरों में दरार आने के चलते प्राथमिक विद्यालय के पास एक बड़ा सा टेट लगा है, जहां 40 से ज्यादा लोग रह रहे हैं। जबकि, कुछ लोग ठंड में खुले में ही रातें गुजारने को मजबूर हैं। टेट के एक ओर बैठी 82 साल की बाली देवी के मन में प्रशासन को लेकर गुस्सा है। गौरा देवी की सहेली रही बाली देवी चिपको आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले चुकी हैं। वो कहती हैं, आपदा में सबसे ज्यादा प्रभावित रैणी गांव ही हुआ है। विश्व में पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाने वाले रैणी वासियों की विपदा में सुध लेने को कोई तैयार नहीं है।
  • भारतीय सनातन धर्म व महावीर दल आज निकालेंगे शो

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