विज्ञान-प्रौद्योगिकी को जनसाधारण तक पहुंचाने में निभाएं भूमिका : डॉ. मानस

दरभंगा।प्रकृतिकेरहस्योंकोउजागरकरनाहीशोधहैऔरयहकार्यदृढ़इच्छाशक्ति,अनुशासनएवं²ढ़संकल्पकेसाथसमुचितमार्गदर्शनमेंहोताहै।उक्तबातेंदेशकेपूर्वरक्षावैज्ञानिकडॉ.मानसबिहारीवर्मानेकही।वेहायाघाटमेंबुधवारकोविकसितभारतफाउंडेशनबिहारब्रांचवअगस्त्याइंटरनेशनलफाउंडेशनबेंगलुरुकेतत्वावधानमेंप्लसटूमहंथकर्णज्योतिउच्चविद्यालयमेंविज्ञानप्रदर्शनीकाउदघाटनकरनेपहुंचेथे।इसदौरानउन्होंनेउपस्थितप्रतिभागीशिक्षकोंसेअनुरोधकियाकिवेपारस्परिकदोषारोपणकोछोड़बच्चोंकासमुचितमार्गदर्शनकरविज्ञानएवंप्रौद्योगिकीकोजनसाधारणतकपहुंचानेमेंअपनीभूमिकानिभाएं।उन्होंनेकहाकिदेशकेमहानवैज्ञानिकडॉ.कलामहमेशाकहाकरतेथेकिएकअच्छाशिक्षकबननेकेलिएपहलेअच्छाछात्रबननाजरुरीहैवशिक्षककेपासहमेशारचनात्मकसोचहोनीचाहिए।इसदौरानसाइंसइंस्ट्रक्टरफवादगजाली,मनोजकुमारयादव,हरिओमयादव,लक्ष्मीकुमारीनेविज्ञानकेविभिन्नआयामोंसेछात्र-छात्राओंकोरु-ब-रुकराया।प्रदर्शनीमेंप्रखंडकेचारविद्यालयोंप्लसटूमहंथकर्णज्योतिउच्चविद्यालयहायाघाट,उत्क्रमितउच्चविद्यालयघोषरामा,मध्यविद्यालयबालकहायाघाटवउत्क्रमितमध्यविद्यालयरसुलपुरकेसातवीं,आठवीं,नौंवींवदसवींकेचयनित63बच्चोंनेभागलिया।मौकेपरप्रभारीप्रधानाध्यापकमो.परवेजनजीर,शिक्षक¨पकीकुमारी,कवितामंडल,अंबिकाकुमारी,अशोककुमार,संजयकुमार,महेशकुमार,प्रमोदकुमार,मंजूरआलमआदिमौजूदथे।