OPINION: सिलेबस के आगे जाएं, बच्चों को कोविड से पहले के हालात में बिठाने के लिए मदद की जरूरत

नईदिल्ली.शिक्षाकेसिलेबसआधारितविचारनेस्कूलोंकेबंदरहनेकेकारणछात्रोंकोजोघाटाहुआहैउसकोकमकरनेकेकिसीविकल्पपरविचारकरनेकेकिसीप्रयासकोअसंभवबनादियाहै.सत्रहमहीनेपहलेजबस्कूलबंदकिएगएथे,किसीकोयहअंदाज़ानहींथाकिकबतककक्षाओंमेंपढ़ाईनहींहोगी.ऑनलाइनशिक्षणकोस्कूलोंमेंछात्रोंकीउपस्थितिमेंपढ़ाईकास्थानापन्नमानागया,परशीघ्रहीऑनलाइनशिक्षणकीसीमाओंकापताचलगया,लेकिनइसकाकोईविकल्पनहींदिखरहाथा,उससमयभीनहींजबकईक्षेत्रोंमेंवायरसकाप्रकोपथोड़ाकमथा.

औरअबजबकक्षाओंमेंपढ़ाईशुरूहोचुकीहै,जोरिपोर्टआरहीहैउससेपताचलताहैकिइसपढ़ाईकोवहाँसेआगेबढ़ायाजारहाहैजहांपरऑनलाइनशिक्षणनेइसेछोड़ाथा.दूसरेशब्दोंमें,शिक्षकोंऔरछात्रोंकेबीचसंवादकाएकमात्रआधारयहपाठ्यक्रम हीहै.यहनकेवलपढ़ाईकेप्रयासकोशक्लदेनेवालाहै,बल्किपाठ्यक्रम(सिलेबस)आवश्यकरूपसेएकरेखीयबनाहुआहैऔरक्याकियाजानाचाहिएइसकेलिएयहशिक्षकोंकेपासकोईऔरविकल्पनहींछोड़ताहै.

जोहोरहाहैउसकेलिएशिक्षकोंकोज़िम्मेदारनहींठहरायाजासकताहै.व्यवस्थामेंउनकास्थाननीचेहैऔरउन्हेंकभीभीअपनेहिसाबसेनिर्णयलेनेकीछूटनहींहोती.जबकोईनिर्णयलियाजाताहैतोउनसेकोईसलाहनहींलीजाती.जबनीतियोंकानिर्माणहोताहै,नतोउससमयउनसेकोईपरामर्शहोताहैऔरनहीउससमयजबप्रिंसिपलऔरस्कूलकेमैनेजरस्कूलकेबारेमेंकोईनिर्णयलेतेहैं.

डिजिटलतकनीकनेशिक्षकोंकेमहत्वकोऔरज़्यादाकमकरदियाहै.वेएककमजोर,औरहाँमेंहाँमिलानेवालेश्रमबलमेंतब्दीलहोचुकेहैं;जिनविकल्पोंकेसाथखड़ानहींहुआजासकताऐसेविकल्पोंकोउनकीमौजूदगीमेंअपनायाजाताहैऔरवेइसकेमूकदर्शकबनेरहतेहैं.इनमेंसेअधिकांशकोतकनीककेज़्यादाप्रयोगकेकारणखुदकेअसंगतबनजानेकाडरभीरहताहै.

कितनावास्तविकहैयहडर?निश्चितरूपसे,यहडरकाल्पनिकनहींहै.स्कूलोंकीश्रृंखलाकेमालिकऔरउसकेप्रबंधकअमूमनयहदावाकरतेहैंकिस्मार्टक्लासनेशिक्षकोंकीज़िम्मेदारीकोबदलदियाहैऔरअमूमनकमकरदियाहै.कृत्रिमबुद्धिमत्ता(एआई)केबलपरचलनेवालीतकनीकभीइसीतरहकेदावेकरतेहैं.अबयहकौनकहसकताहैकियेदावेबढ़ा-चढ़ाकरकिएगएहैं?निजीऔरसरकारीदोनोंहीतरहकेस्कूलोंकीप्रकृतिमेंइतनाज़्यादाअविश्वासमौजूदहैकिकर्मचारियोंकीसंख्यामेंकमीलानाऔरइसतरहसेवेतनखर्चमेंहोनेवालीबचतकीराशिसेनयीतकनीकोंवालीमशीनख़रीदनाविक्षिप्तकल्पनानहींलगता.

शायदइन्हेंइसतरहकाडरमानाजारहाहैजोअभीभविष्यकेगर्भमेंहै.जोबातआँखोंकेसामनेहैवहयहकिलगभगदोसालतकस्कूलोंकेबंदरहनेकेदौरानजबछात्रघरोंमेंरहनेकेआदीहोगएथे,अबकक्षाओंकेदुबाराखुलनेपरछात्रोंकीउपस्थितिमेंकक्षाओंकोकैसेचलायाजाए.आनेवालेसमयमेंकाफ़ीसमयतकनियमितस्कूलजीवनकेप्रतिउनकेव्यवहारऔरउनकेप्रत्युत्तरकासामनाकरनाआसाननहींहोनेवालाहै.फिरइसबातकादबावहोगाकिबच्चोंकोपरीक्षाओंऔरउपलब्धिकेसर्वेक्षणोंकेलिएजल्दसेजल्दतैयारकियाजाए.शिक्षकोंकेपासकाफ़ीकामहोगाऔरउनकेहृदयमेंअगरबच्चोंकेभावनात्मकस्वास्थ्यकोलेकरकोईचिंताहै,तोउन्हेंइसेअपनेदिलमेंहीदबाकररखनापड़ेगा.

औरइसकेबावजूदकिस्कूलदुबाराखुलगएहैं,ऑनलाइनकाविकल्पखुलाहुआहै.शिक्षकोंकेलिएइसकाक्याअर्थहैइसपरविचारनहींहुआहै.बहुतज़्यादाऑनलाइनकार्यकरानेसेहुईउनकीथकानऔरबढ़जाएगीअगरशिक्षकोंकोएकहीसाथदोनोंहीमाध्यमोंकोज़िंदारखनेकेलिएकहाजाताहै.लंबेसमयतककक्षाओंकेबंदरहनेकेकारणकोविडकेबादकक्षाओंकोसंभालनेमेंउन्हेंअज्ञातस्थितियोंकासामनाकरनापड़सकताहै;ऐसेबच्चोंकेसाथसंपर्कबनाएरखनाशिक्षकोंकेलिएबहुतमुश्किलहोगाजिन्हेंउनकेमां-बापस्कूलआनेनहींदेरहेहैं.क्याशिक्षकोंकोउनछात्रोंपरज़्यादाध्यानदेनाचाहिएजोउनकेसामनेबैठेहैंयाउन्हेंअपनेस्मार्टफ़ोनकेस्क्रीनपरज़्यादाध्यानदेनाचाहिए?कोईशिक्षकयहदोनोंहीकामएकसाथकरलेइसकीकल्पनाकरनामुश्किलहै;औरदोनोंहीसमूहमेंबैठेबच्चेउनकीआवाज़कोठीकसेसमझसकेंइसकेलिएवेअपनीआवाज़,अपनीस्पीचकोकैसेएडजस्टकरेंगे.

यहतथ्यकिप्राथमिकस्कूलसबसेअंतमेंखुलेंगे,हमारीव्यवस्थाऔरउसकोनिर्देशितकरनेवालेपरिदृश्यकीपोलखोलदेताहै.जहांतकसंस्थागतसहयोगकीबातहै,छोटेबच्चेइससेसर्वाधिकप्रभावितहोनेवालेसमूहमेंआतेहैं.यहसुनिश्चितकरनाकिआठसालकीशिक्षापूरीकिएबिनाकोईबच्चास्कूलनहींछोड़े,शिक्षापरहमारीसामूहिकसमझमेंहुएविकासऔरइससेसंबंधितनीतियोंकेनिर्धारणकेक्षेत्रकीबड़ीउपलब्धिथी.संसदसे2009मेंशिक्षाकाअधिकारक़ानूनपासकरनामहत्त्वपूर्णमीलकापत्थरथा.इसक़ानूनकोकमजोरकरनेकीप्रक्रियाजारीथीऔरयहक़ानूनलागूनहींहोइसकेलिएअथकप्रयासचलरहाथा,परकोविडनेइसअधिकारकोसबसेज़्यादानुकसानपहुँचायाहै.अबहमारेचारोंओरएकनयीतरहकीवास्तविकताजड़पकड़रहीहै.

बच्चोंकेभविष्यकेप्रतिचिंतारखनेवालेकईसिविलसोसायटीसमूहऔरव्यक्तियोंने‘शिक्षाहानि’(lossoflearning)कासवालउठायाहै.कुछमामलोंमें,इसबातकाप्रयोगस्कूलोंकोखोलनेकेलिएराज्यपरदबावडालनेकेलिएहुआ.हमइसकाफ़ैसलानहींकरसकतेकिइसवजहसेकुछराज्योंमेंसरकारनेस्कूलखोलेहैं.यहाँतककिइनराज्योंमेंभी,निजीस्कूलोंनेइसदबावकेसामनेघुटनेटेकेहैं.वेशायदयहमानतेहैंकिउनकाऑनलाइनशिक्षण‘शिक्षाहानि’(लर्निंगलॉस)सेछात्रोंकापर्याप्तरूपसेबचावकररहाहै.जबयेअंततःखुलेंगे,तभीजाकरयेस्थितिकोठीकसेसमझपाएँगे.

जहांतकसरकारीस्कूलोंकीबातहै,वेनियमितपढ़ाईजारीरखेहुएहैं.जोसूचनाएँमिलरहीहैंउससेयहसंकेतमिलताहैकिकुछराज्योंमेंसरकारीस्कूलअपनेबच्चोंकोराष्ट्रीयउपलब्धिसर्वेक्षणकासामनाकरनेकेलिएतैयारकररहेहैं.यहसर्वेक्षणनवंबरमेंहोगा.यहबातहमेंभलेहीक्रोधितकरे,परयहविचारइसविश्वाससेजुड़ाहुआहैकिऑनलाइनशिक्षानेबच्चोंकोशिक्षाहानिसेबचायाहै.अगरउपलब्धिसर्वेक्षणयहसाबितकरदेताहै,तोऑनलाइनशिक्षाकेआलोचकोंकामुंहबंदहोजाएगाऔरउनकाभीजोयहमानतेहैंकिलंबेसमयतकस्कूलकेबंदरहनेसेबच्चोंकीपढ़ाईलिखाईमेंगिरावटआयीहै.

‘शिक्षाहानि’कीबहसकेसाथवास्तविकसमस्यायहहैकियहबच्चोंकेविस्तृतविकासकीज़रूरतकोनज़रंदाज़करताहैऔरवहशिक्षणकेपरिणामकोसिर्फ‘सीखने’सेजोड़करदेखताहै.सीखनेकेसैद्धांतिकअध्ययनकेक्षेत्रमेंजोउन्नतिहुईहैउसनेयहनिर्धारितकियाहैकिबच्चोंकामस्तिष्कबहुतहीजटिलतरीक़ेसेविकसितहोताहै.बच्चोंकेमस्तिष्ककीक्षमताकीअभिव्यक्तिकैसेहोतीहैऔरयहकैसेआकारलेताहैउसकेलिएबच्चेकेआसपासकेवातावरणकाप्रभावबड़ाकारकहोताहै.

इसआमधारणाकेबावजूदकिमनोविज्ञाननेयहधारणाबनायीहै,हालकेवर्षोंमेंकईदेशोंमेंशिक्षापरहोनेवालीबहसमेंबड़ाबदलावआयाहैऔरइनमेंहमारादेशभीशामिलहै.शिक्षाकासंकीर्णविचारएकबारफिरबहसकालोकप्रियविषयबनगयाहै.यहविचारकईस्तरोंपरव्यवस्थाकीवर्तमानवास्तविकताओंकेसाथमेलखाताहै.इसमेंसेएकहैमां-बापकीचिंताओंकास्तर.येचिंताएँप्रतिस्पर्धात्मकपरीक्षाओंकेलिएबच्चोंकीतैयारीऔरउससिलेबसकोलेकरहैजिनपरयेआधारितहैं.ऐसेउद्योगजोबच्चोंकोइनपरीक्षाओंकेलिएतैयारकरतेहैंवहएकदूसरास्तरहैजहांपरशिक्षाकोबहुतहीसंकीर्णअर्थमेंलियाजाताहै.

शिक्षाकासिलेबसआधारितविचारविभिन्नउम्रकेबच्चोंपरस्कूलसेदूररहनेकेअसरकोकमकरनेकेलिएस्कूलोंकोकिसीविकल्पपरग़ौरकरनेकेप्रयासकोअसंभवसाबनादेताहै.एकविकल्पहैकिआर्ट्सकोज़्यादातरजीहऔरसमयदियाजाए.जीवनमेंव्यवधानकीलंबीअवधिकीस्थितिमेंयुवामस्तिष्ककोदुबाराव्यवस्थितकरनेमेंसंगीतऔरथिएटरकाबड़ामहत्वहै.विजुअलआर्ट्सकीभीऐसीहीभूमिकाहैविशेषकरप्राथमिकस्कूलकेस्तरपर.इसछोटेकिएगएसत्रकेशेषअवधिकेलिएसमय-सारणीकोऐसेपुनर्व्यवस्थितकियाजाएकिसुरुचिपूर्णअनुभवकोनियमितविषयोंसेज़्यादामहत्वमिलेतोइससेबच्चोंकोलोकनीतिऔरस्कूलजीवनकेसाथदुबारापटरीबैठानेमेंमददमिलेगी.

हालांकि,इसबातकीसंभावनाकमहैकिस्कूलोंपर‘शिक्षाहानि’कोपूराकरनेकाजोदबावहोगावहउन्हेंआर्ट्सकेसाथकिसीभीतरहकेगंभीरसंवादकीअनुमतिनहींदेगाभलेहीबच्चोंकेमस्तिष्कपरमरहमकीतरहकामकरनेवालेकेरूपमेंइसकीपहचानक्योंनकीगयीहै.

(कृष्णकुमारएकशिक्षाशास्त्रीहैंऔर2004से2010तकवेNCERTकेनिदेशकभीरहेहैं.यहविचारउनकेनिजीहैं.)

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