नयी शिक्षा नीति में मानव विकास, ज्ञान के विस्तार का मूल लक्ष्य नदारद : कांग्रेस

नयीदिल्ली,दोअगस्त(भाषा)कांग्रेसनेरविवारकोकहाकिनयीराष्ट्रीयशिक्षानीतिमेंमानवविकासऔरज्ञानकेविस्तारकामूललक्ष्यगायबहै।पार्टीनेकहाकिइसमें“लोकप्रियशब्दों”और“लफ्फाजी”काभंडारहैलेकिनआवश्यकवित्तसंसाधनऔरक्रियान्वयनकेलिएसुसंगतयोजनाकाअभावहै।पार्टीनेआरोपलगायाकिनीतिमेंसंसदीयविचारविमर्शकोदरकिनारकियागयाऔरआरएसएसकोछोड़करकिसीशैक्षणिकसमुदायकेसाथकोईचर्चानहींकीगई।कांग्रेसनेताओं-एमएमपल्लमराजू,राजीवगौड़ाऔररणदीपसुरजेवालानेयहांसंवाददाताओंकोसंबोधितकरतेहुएकहाकिनयीशिक्षानीतिगरीबऔरअमीरकेबीच‘डिजिटलखाई’(प्रौद्योगिकियोंतकपहुंचमेंसमुदायोंकेबीचअसमानता)पैदाकरनाचाहतीहैक्योंकियहसरकारीशिक्षाकेनिजीकरणकोबढ़ावादेतीहै।उन्होंनेदावाकियाकिइससेशिक्षा‘‘मध्यवर्गतथासमाजकेवंचितवर्गोंकीपहुंचसेदूरहोनेवालीहै।”नेताओंनेशिक्षापरसकलघरेलूउत्पाद(जीडीपी)काछहप्रतिशतखर्चकरनेकीसरकारकीमंशापरभीसवालउठाएऔरकहाकिमोदीसरकारकेतहत2014मेंयहघटकरजीडीपीका4.14प्रतिशतऔरफिलहाल3.2प्रतिशतरहगयाहै।उनहोंनेकहाकिकोविड-19वैश्विकमहामारीकेचलतेसंसाधनोंकेअभावकेकारणव्ययमेंकटौतीकेचलतेइसकेऔरघटनेकीहीआशंकाहै।उन्होंनेएकसंयुक्तबयानमेंकहा,“राष्ट्रीयशिक्षानीति2020,जिसकालक्ष्यस्कूलएवंउच्चशिक्षामेंपरिवर्तनकारीसुधारोंकेलिएरास्तातैयारकरनाहै,उसमेंकेवललोकप्रियशब्दों,शब्दावलियों,दिखावाऔरलफ्फाजीकाभंडारहैऔरइसविशालदृष्टिकोणकोलागूकरनेकेलिएजरूरीआवश्यकवित्तसंसाधनोंतथासुसंगतयोजनाऔररणनीति,स्पष्टप्रगतिकाअभावहै।”उन्होंनेकहा,“कुलमिलाकर,राष्ट्रीयशिक्षानीति2020मेंमानवविकासऔरज्ञानकेविस्तारकामूललक्ष्यनदारदहै।”केंद्रसरकारनेनयीशिक्षानीतिकेतहतव्यापकसुधारोंकीबुधवारकोघोषणाकीथी।कांग्रेसनेताओंनेकहाकिवैश्विकमहामारीकेबीच,जबसभीशैक्षणिकसंस्थानबंदहैं,नयीशिक्षानीतिलानाअपनेआपमेंसवालउठानेलायकहै।उन्होंनेआरोपलगायाकिऔरतोऔरपूरेशैक्षणिकसमुदायनेशिकायतकीहैकिउनसेकोईविचार-विमर्शनहींकियागया।उन्होंनेबयानमेंकहा,“ऐसीनीतिजोहमारीमौजूदाएवंभावीपीढ़ियोंकोप्रभावितकरतीहै,उसेलेकरसंसदीयविचारविमर्शतककोभीदरकिनारकियागया।वहींइसकेउलटशिक्षाकाअधिकारकानूनकारास्तासाफकरनेकेलिएगहनसंसदीयएवंव्यापकविचार-विमर्शकियागया।”पूर्वमानवसंसाधनविकासमंत्रीपल्लमराजूनेकहा,“शिक्षाक्षेत्रकेहदसेज्यादाकेंद्रीकरणकेकारणबहुतसीगंभीरचुनौतियांसामनेआएंगी।उन्होंनेकहा,“मंशाभलेहीदिखतीहोलेकिननीतिमेंगंभीरखामियांहैं।”उन्होंनेकहा,‘बादकेचरणोंमेंभी,हमपूछनाचाहतेहैंकिखाकाक्याहै?संसाधनकाआवंटनकिसतरहकाहै?आपसार्वभौमिकताकेव्यापकआदर्शकोलागूकरनेकीयोजनाकैसेबनारहेहैं?ऑनलाइनशिक्षाकोलेकरमंशाजाहिरकीगईहै।लेकिनऑनलाइनशिक्षातकपहुंचकेस्तरमेंबड़ीविषमताहै,नसिर्फनिजीवहनीयक्षमताकेकारणबल्किसंपर्क(कनेक्टिविटी)कीगुणवत्ताकेलिहाजसेभी।यहबड़ाडिजिटलविभाजनपैदाकरेगा।”आईआईएमकेपूर्वसंकायसदस्यगौड़ानेपूछाकिमहत्वकांक्षीयोजनाओंकेवित्तपोषणकेलिएपैसाकहांसेआनेवालाहै।उन्होंनेकहा,“यायेपैसालोगोंकीजेबसेलियाजानेवालाहै।”गौड़ानेकहा,“मोदीसरकारकीकिसीभीनीतिकोउसकेपिछलेछहसालकेअनुभवकेलिहाजसेदेखनाहोगा।उदाहरणकेलिए,दिल्लीविश्वविद्यालय।इससरकारकीपहलीकार्रवाईडीयूमेंचारसालकेकार्यक्रमकोखत्मकरनाथाऔरअबहमफिरउसीतरफलौटरहेहैं।”सुरजेवालानेकहाकिनयीनीतिकागजपरएकदस्तावेजहीरहेगीक्योंकिजरूरीवित्तीयसंसाधननहींहैं।साथहीउन्होंनेपूछाकि12लाखस्कूलशिक्षकोंकीरिक्तियोंकोभरनेकेसंबंधमेंसरकारकाक्याप्रस्तावहै।उन्होंनेकहाकिआधिकारिकरिकॉर्डकेमुताबिक,देशमेंकेवल10प्रतिशतसरकारीस्कूलोंकेपासकंप्यूटरहैऔरकेवलचारप्रतिशतकेपासनेटवर्ककनेक्टिविटीहै।