..मैं अकेला मुश्किलों पर तान सीना चढ़ गया

जेएनएन,बिजनौर।नजीबाबादमेंसुमनसाहित्यिकपरीकीओरसेआनलाइनकाव्य-गोष्ठीकाआयोजनकियागया।कवि-कवयित्रियोंनेरचनाएंपेशकरखूब-वाहवाहीलूटी।राजीवप्रखरनेमांवीणापाणिकीवंदनासेकाव्यगोष्ठीकाशुभारंभकिया।कवयित्रीदीपिकामाहेश्वरीसुमननेकहाकिविश्वकर्माजीहोजाएजगहधन्यजहांआकररुकें,बनजाएप्याराआशियानाजहांआकररुकें।डा.रीतासिंहनेकहाकिसूरतप्राचीसेजबझांकेधरतीपरमुस्काताकौन,खगसमूहमेंपरफैलाएकलरवगीतसुनाताकौन।कृष्णकुमारदुबेनेकहाकिलेगयामंजिलतलकजोरहगुजरअच्छालगा,साथजिसनेहैनिभायाराहबरअच्छालगा।राजीवप्रखरनेकहाकिदूरियोंकाइकबवंडरजबकहानीगढ़गया,मैंअकेलामुश्किलोंपरतानसीनाचढ़गया।विद्याशंकरअवस्थीपथिकनेकहाकिचक्रव्यूहकानामसुनातोधर्माचार्यभीघबड़ाए,रणभूमिमेंकलक्याहोगासोंचसोचकरचकराए।डा.मनोजरस्तोगीनेकहाकिसुनरहेयहसालआदमखोरहै,हरतरफचीख,दहशतशोरहै।बसंतकुमारशर्मानेकहाकिकुछऔरनहींयूँहीसतानेकेलिएआ,हकहैमेरेदिलपरयेजतानेकेलिएआ।डा.कुलदीपनारायणसक्सेनानेकहाकिस्वप्नसंजोनाव्यर्थनहींहै,बाधाओंकातर्कयहीहै।गोविदरस्तोगीनेकहाकिधरतीकेकणकणमेंराधे,मनमेंमनदर्पणमेंराधे।मनोजकुमारश्रीवास्तवनेकहाकिमैंराष्ट्रधर्ममैंपुण्यकर्म,जोबलिदानोंकेगीतलिखे।समूह-संस्थापिकातथाकार्यक्रम-संचालिकादीपिकामाहेश्वरीसुमननेसाहित्यकारोंकाआभारव्यक्तिकिए।