लोक अदालत में विवादों का सदा के लिए होता है निदान : पीडीजे

मेदिनीनगर:लोकअदालतमेंविवादसदासर्वदाकेलिएमिटजाताहै।यहत्वरितन्यायपानेकासर्वश्रेष्ठमंचहै।वैकल्पिकविवादनिपटारेकोलेलोकअदालतकारास्ताचुनें।

उक्तबातेंपलामूकेप्रधानजिलावसत्रन्यायाधीशविजयकुमारनेकहीं।वेशुक्रवारकोव्यवहारन्यायालयपरिसरमेंआयोजितइसवर्षकेप्रथममासिकलोकअदालतउद्घाटनसमारोहमेंबोलरहेथे।इसकेपूर्वउन्होंनेलोकअदालतकाउद्घाटनदीपप्रज्ज्वलितकरकिया।मौकेपरअधिवक्तासंघकेअध्यक्षसचिदानंदतिवारीउर्फनेहरूनेकहाकिवादकारीलोकअदालतकालाभउठाएंवअधिकसेअधिकमामलोंकानिस्तारणकराएं।लोकअदालतकीअवधारणाहीसुलभवशीघ्रन्यायसेहै।मामलानिस्तारणकोलेसातपीठकागठनकियागयाथा।प्रथमपीठमेंभरणपोषणकेएकमामलेकानिस्तारणप्रधानन्यायाधीशकुटुंबन्यायालयबीडीतिवारीद्वाराकियागया।पीठसंख्यादोमेंएमएसीटीकाएकवविद्युतविभागकेछहमामलेकानिस्तारणडीजेडीकेपाठकनेकिया।विद्युतविभागको40हजाररुपयेकाराजस्वप्राप्तहुआ।उत्पादविभागको1लाख36हजार800,वनविभागको1लाख21हजार300,बीएसएनएलको63हजार268रुपयेराजस्वप्राप्तहुआ।मौकेपरडीजेबीकेतिवारी,शत्रुंजयकुमार¨सह,मनीषरंजनआनंदप्रकाश,सीजेएमसंजयकुमारचौधरी,आसिफइकबालअशोककुमार,सफदरअलीनैयर,राजेन्द्रप्रसाद,विक्रांतरंजन,रोहितकुमार,दीपककुमार,मनोजकुमार,एमजेडतारा,अमितगुप्ता,अधिवक्तावीनामिश्रा,महेंद्रतिवारी,राजेश्वरपांडेय,श्यामनरायणराम,संतोषपांडेय,शशिभूषणदुबे,अखिलेशकुमारसमेतदर्जनोंलोगउपस्थितथे।