कविता वो जो मन के अंदर से निकले : निलय उपाध्याय

बक्सर।कवितावोरसहै,जोआपकोभीतरसेबदलदे।अर्थात,जोथेवोनहींहैं,जोनहींथेवोहैं।उक्तबातेंप्रसिद्धसाहित्यकारनिलयउपाध्यायनेशनिवारकोएकपुस्तकलोकार्पणकार्यक्रमकेतहतकही।कार्यक्रमज्योतिप्रकाशलाइब्रेरीमेंआयोजितकियागयाथा।जिसकीअध्यक्षतावरीयअधिवक्तारामेश्वरप्रसादवर्मानेकी।

इसदौरानसभामेंमौजूदअतिथियोंनेजगतनंदनसहायद्वारारचितपुस्तककालोकार्पणकिया।यहांबतादेंकिवेसृजनलोककेसंपादकभीहैं।कार्यक्रमकासंचालनगजलगोकुमारनयननेकिया।इसदौरानवक्ताओंनेसमाजमेंसाहित्यकेमहत्वपरचर्चाकरतेहुएलेखनविधासंबंधितबातोंपरभीप्रकाशडाला।कार्यक्रममेंरेडक्रॉसकेउपाध्यक्षडॉ.शशांकशेखर,शिवबहादुरपांडेयप्रीतम,राजीवमिश्राआचार्य,रामदेवकेसरी,वैदेहीश्रीवास्तव,रविकांतउपाध्याय,दीपचंददास,बरनवालजीसमेतकाफीसंख्यामेंसाहित्यप्रेमीमौजूदथे।दूसरीओर,मध्यविद्यालयबेलाउरकेप्रांगणमेंहिदीमेंवर्तनीकीसामान्यअशुद्धियोंएवंउसकेसमाधानपरएकपरिचर्चाकीगई।जिसकासंचालनसंजीवकुमारतिवारीनेकिया।इसदौरानआयोजितपरिचर्चामेंनिलयउपाध्यायसमेतविष्णुदेवतिवारी,कुमारनयन,मंगलेशमुफलिश,विमलकुमार,डॉ.श्वेतप्रकाश,अखिलेशपांडेय,भरतकुमार,राजीवमिश्रा,प्रवीणकुंवरआदिनेभीअपनेविचाररखे।