दौर ए दिल्ली : जब दिल्ली में रहकर पृथ्वीराज कपूर ने सीखा राजनीति का ककहरा

नईदिल्ली, विष्णुशर्मा। 'अमिताभकीअभिनयमेंरुचिथी।शेरवुडमेंसर्वश्रेष्ठअभिनयकेलिएउसेकैंडलकपमिलाथा।'ओथेलो'केनाटकमेंउसनेकैशियोंकीभूमिकासफलतापूर्वकनिभाईथी।फिल्ममेंजानेकीइच्छाउसनेएकाध-बारप्रकटकीथी,फिल्मोंकीदुनियामेंहमारासंपर्कसिर्फपृथ्वीराजकपूरसेथा,जोउनदिनोंसंसदसदस्यभीथे।एकबारउन्हेंघरबुलाकरहमनेअमितकेफिल्ममेंजानेकीबातचलाईथी,परउनकीओरसेकोईप्रोत्साहननामिला,येलाइनेंहरिवंशरायबच्चननेअपनीआत्मकथाकेचौथेभाग'दशद्वारसेसोपानतकमेंलिखीहैं।हालांकिबिगबीनेखुदमानाहैकिशशिकपूरनेउनकीकाफीमददकीथी।सबकोलगेगाकिमुंबईकेदोबड़ेपरिवारोंकेबीचयेवाकयामुंबईमेंघटाहोगा,लेकिनयेघटनादिल्लीमेंबच्चनपरिवारकाघर13,वेलिंगटनक्रिसेंटकीहै,जिसकेबगलके12नंबरकेबंगलेमेंकभीइंदिरागांधीभीआकररहीथीं।दिल्लीसेसालोंतकनातानासिर्फबच्चनपरिवारकारहाहैबल्किपृथ्वीराजकपूरकाभीरहाहै।दोनोंकोदिल्लीबुलानेवालेथेपंडितनेहरू।हरिवंशरायबच्चनकोविदेशविभागकीहिंदीसेवामेंबुलाकरऔरपृथ्वीराजकपूरकोदोदोबारराज्यसभामेंमनोनीतकरके।पंडितनेहरूकेदादागंगाधरनेहरूजहांदिल्लीकेकोतवालथे,वहींपृथ्वीराजकपूरकेपिताबशेश्वरनाथपेशावरमेंपुलिसआफिसरथे।

दीवारकोदेखकरबहुतप्रभावितहुएथेसरदारपटेल

हालांकिदिल्लीसेउनकापुरानानाताथा,वोअक्सरकनाटप्लेसमेंसोभासिंहपरिवारकेरीगलवरिवोलीसिनेमामेंअपनेनाटकोंकामंचनकरनेआतेथे।राशिदकिदवईकीकिताब'नेताअभिनेता'मेंजिक्रहैकिकैसेकांग्रेसवर्किंगकमेटीकेलिएआयोजितपृथ्वीराजकेएकप्ले'दीवार'कोदेखकरसरदारपटेलइतनेखुशहोगएथेकिप्लेकेबादआधेघंटेतकवोउनकीतारीफकरतेरहेऔरफिरकहाकि'जोहमदोसालमेंअपनेकार्यकर्ताओंकोनहींसिखापाए,आपनेएकप्लेसेआधेघंटेमेंसिखादिया'।इसतरहकांग्रेसनेताओं,खासतौरपरपंडितनेहरूकेकरीबआगएथेपृथ्वीराजकपूर।

प्रिंसेसपार्कमेंमिलाथाघर

जब1952मेंकईजानेमानेचेहरोंकेसाथसाथपृथ्वीराजकपूरभीपहलीबारराज्यसभाकेलिएचुनेगए,तोउनकोइंडियागेटकेपासप्रिंसेसपार्कमेंघरमिला।हालांकिशुरुआतकेदिनोंमेंवोकांस्टीट्यूशनहाउसमेंरहाकरतेथे,जोउनदिनोंकस्तूरबागांधीमार्गपरहुआकरताथा।जबवोसत्रकेदौरानदिल्लीरहाकरतेथे,सुबहकावक्तमुलाकातियोंकेलिएतयथा।बिनाचुनावकेराज्यसभाकेलिएनामिनेशनमिलातोआलोचनाभीहुई,उन्हेंंसफाईभीदेनीपड़गईथी।

लेकिनवोआजकेसचिनयारेखाजैसेमनोनीतसदस्योंकीतरहनहींथे,वोमुद्देउठानेमेंसक्रियरहे।आपयेजानकरचौंकजाएंगेकिफांसीकीसजाखत्महोनीचाहिए,इसकाप्रस्तावभी25अप्रैल1958कोपहलीबारपृथ्वीराजकपूरनेसंसदमेंरखाथा,कुल14सदस्योंनेइसविषयपरबोला,लेकिननौउनकेप्रस्तावकेखिलाफबोले।उन्होंनेथिएटरमेंकामकरनेवालोंकेलिएरेलकिराएमें75फीसदीकीकटौतीकीराहतभीसरकारसेदिलवाई।नेहरूउन्हेंकईदेशोंमेंसांस्कृतिकप्रतिनिधिमंडलमेंभेजदियाकरतेथे,वोचारसालतकआलइंडियारेलवेवर्कर्सयूनियनकेअध्यक्षभीरहे।

सबसेदिलचस्पथीउनकीगांधीजीकोलेकरस्पीच,25नवंबर1953कोएकपुर्नवासराहतबिलपरबहसकेदौरानपृथ्वीराजकपूरनेबतायाकिकैसेआजादीवालेदिनजश्नमनाएजानेकेबजायगांधीदंगोंकेशिकारव्यक्तियोंकीमददकेलिएनोआखलीमेंनंगेपैरघूमरहेथे।येबिलउसीभावनाकोबढ़ाताहै।ऐसेमेंउनकेअंदाजफिल्मीहुआकरतेथे।

1952मेंदोसालऔर1954सेपूराकार्यकालकरनेकेबाददिल्लीसेउनकानाताटूटसागया,जोबादमेंउनकीनातिनरितुकीशादीसेजुड़ा।नेहरूजीराजकपूरकीफिल्म'अबदिल्लीदूरनहीं'मेंएकरोलकरनेकेलिएतैयारहोगएथे,जहांएकबच्चाउन्हेंअपनेपिताकीरिहाईकेलिएपत्रदेताहै,लेकिनउनकेसलाहकारोंनेपीएमकोफिल्ममेंकामकरनाठीकनहींकहकर,मनाकरवादिया।एकबारनेहरूस्टालिनसेमास्कोमेंमिलेतोस्टालिननेउनसेपूछाकि'येराजकपूरकौनहै,जिसकेबारेमेंमैंइतनासुनरहाहूं'लेकिनवक्तबदला,विचारबदले,एकदौरआयाजबपृथ्वीराजकपूरकेनातीऋषिकपूरनेहीसवालउठाएकिगांधीनेहरूपरिवारकेनामइतनेस्टेडियम,एयरपोर्टऔरसड़केंक्योंहैं?